आधुनिका अध्याय 6 शर्म आती है मगर....
वनिता और शिरीष का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों के चर्चे पूरे ऑफिस में होने लगे। सबकी नजरों में उनका प्यार एक वर्जित फल था। जहां लोगों ने अचानक वनिता की शादी और उसके आने वाले रिश्तों में ज़रुरत से ज़्यादा दिलचस्पी दिखाना शुरू किया वहीं शिरीष को दबे ढंके तानों का निशाना बनाया जा रहा था। शर्मा और साहनी साहब यथायक्ति वनिता के लिए अपने मन में भरा ज़हर उगलते रहते थे। इन सब से बेखबर वनिता अपनी शादी और शिरीष के साथ अपने भविष्य के सपने सजाए तैयारियां करने लगी थी। शिरीष और उसके दो भाईयों का बेहद छोटा सा परिवार था। पापा के बाद अपने घर को सम्भालने की कोशिश करते शिरीष को वनिता के रूप में वो साथी मिला जिस पर वो आंख बंद करके भरोसा करने लगा था। वनिता जिसकी ज़िन्दगी में सुनहरे सपनों और अलमारी में प्यारी प्यारी साड़ियों ने एक अरसे बाद जगह बनाई थी इन सब से बेखबर शिरीष के साथ को पूरी तरह महसूस करने और अपनी ज़िंदगी के इस ख़ूबसूरत दौर को जीने में लगी हुई थी।
पर वनिता इस सच से अनजान थी कि उसकी पीठ पीछे उसके लिए एक ऐसा जाल बुना जा रहा था जिसमें फंस कर उसका भविष्य और शिरीष के साथ उसका रिश्ता दोनों ही अंधकारमय होने वाले थे। और फिर एक दिन शिरीष के एक सवाल ने वनिता के कदम थाम दिए...'मैम हम शादी के बाद रहेंगे कहाँ?' 'मेरे लिए तो दोनों ही घर अपने हैं।' ' पर शादी के बाद लड़की का घर और उसकी सही जगह उसके पति के साथ है।पर आप शायद अपने बड़े घर का मोह नहीं छोड़ पाएंगी। है ना!' शिरीष की बात सुनकर वनिता का दिल डूब सा गया। उसने शिरीष से इतने कड़वे बोल की अपेक्षा नहीं कि थी। उसने तो इस बारे में ज़्यादा सोचा भी नहीं था। उसे लगा था कि शिरीष एक प्रगतिशील सोच वाला व्यक्ति है और उसकी सफलता को खुले दिल से अपना लेगा। पर वनिता की ज़िंदगी में दाखिल होते ही शिरीष को अपनी कमतरी का एहसास सताने लगा था।
बार बार वनिता की सफलता और ऊंची पद प्रतिष्ठा उसकी आँखों के आगे आकर उसे उसकी कमतरी का एहसास दिलाती रहती थी। इस सब से अनजान वनिता हमेशा उसे अपनी छूटी हुई पढ़ाई को जारी रखने और अपने व्यक्तित्व के हर पहलू को निखारने में मदद करने की कोशिशों में लगी रहती थी। वनिता की सोच में ऊंच नीच के लिए कोई स्थान न था। वो तो बस शिरीष को उसकी योग्यता के अनुसार उसके सही मकाम पर देखना चाहती थी। अपने मन के सारे द्वंद के बावजूद शिरीष ने कभी वनिता को ये एहसास नहीं होने दिया कि वह शादी के फैसले पर अटल नहीं है और एक विकल्प भी तेजी से उसके लिए तलाशा जा रहा है।
शर्मा और साहनी को जब लगा कि सीधे तौर की लड़ाई में वनिता उन पर भारी पड़ सकती है तो उन्होंने वो किया जो ये समाज किसी भी सफल और आत्मविश्वासी औरत के साथ करता है। उन्होंने वनिता के चरित्र हनन के लिए उस पर बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाने शुरू कर दिए। इसके साथ साथ जब भी कोई पारिवारिक समारोह होता वो वनिता को निशाना बना कर वहां उपस्थित महिलाओं से ऐसी बातें करते कि वो भी उसके बारे में बिना सोचे समझे ऐसी ही बातें करने लगीं। शिरीष की मां तक भी ये सब चर्चा पहुंची तो वो चिंता में घिर गईं । दोनों की जात बिरादरी एक होने के बावजूद वनिता की उम्र और उसकी ऊंची नौकरी उनकी आंखों में खटकने लगी थी। इस समाज की विडंबना यही है कि यदि किसी कारणवश पुरुष का रिश्ता टूट जाए या वो अपने कैरियर को प्राथमिकता दे और शादी न करना चाहे तो समाज बड़ी सहानुभूति से पेश आता है। वहीं जब कोई स्त्री अपने कैरियर की खातिर शादी को दरकिनार करती है तो आगे उसके लिए रास्ते बंद कर दिए जाते हैं।
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