आधुनिका : story of a working woman अध्याय 1 ये शादी नहीं हो सकती
कामकाजी लड़कियों को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं। यह कहानी उसका खंडन करने का एक छोटा सा प्रयास है। इस कहानी के पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं पर वास्तविकता से कहीं न कहीं प्रेरित हैं।
अध्याय 1 ये शादी नहीं हो सकती
वनिता ने फ़ोन उठाया और इससे पहले कि उसका इरादा बदल जाए, उसने कॉल बटन दबा दिया। फोन की घंटी बजते बजते थक कर बंद होने ही वाली थी कि शिरीष की झुंझलाई हुई Hello' उसके कानों में पड़ी और एक बार फिर उसकी आँखों में आंसू छलक आए। पिछले कुछ दिनों से उसकी आंखें वक़्त बेवक़्त बरसती ही रहती थीं। किसी तरह खुद पर काबू पाकर वनिता ने कहा 'क्या ये तुम्हारा अंतिम निर्णय है?' शिरीष फट पड़ा ' हां! ये मेरा अंतिम निर्णय है। ये शादी नहीं हो सकती। तुम मेरे घरवालों को ज़रा भी पसंद नहीं हो और सच कहूं तो मुझे भी। तुम ऐसी लड़की हो ही नहीं जो किसी का घर सजा सके। तुम तो बस अपने होठों पर मुस्कान सजा कर रोज़ काम पर निकल जाती हो। पीछे छूटे घर से बेपरवाह। मां ने तो पहले ही कहा था कामकाजी लड़कियों से दूर रहने के लिए। मैंने ही उनकी बात नहीं मानी और तुम मेरे गले पड़ गई। मैंने शादी करने का निर्णय ले लिया है । तुम भी कोई अच्छा सा लड़का देख कर .... ' इसके आगे सुनने की वनिता में हिम्मत ही नहीं थी। फोन उसके हाथों से छूट गया और वह तकिए में मुंह छिपा कर फूट फूट कर रो पड़ी। जिस इंसान के साथ उसने जीवन बिताने के सपने देखे थे वो आज उसके सपनों पर पांव रख कर अंधाधुंध विपरीत दिशा में दौड़े जा रहा था। एक आज का दिन था कि शिरीष को उसकी आवाज़ तक अच्छी नहीं लग रही थी और वहीं दो साल पहले....
' मैम आपकी आवाज बहुत मीठी है और लहज़ा भी कितना खूबसूरत है। काश मैं भी आपकी तरह बोल पाता।' शिरीष के कहने पर वनिता सर झुका कर मुस्कुरा दी। उसकी प्रशंसा भरी आंखें वनिता के चेहरे से हट ही नहीं रही थीं। तालियों के शोर से गूंजते हुए हॉल में, अगली प्रस्तुति की घोषणा करने वनिता फिर से stage पर चली गई।
वनिता एक बड़ी telecom कंपनी में senior engineer थी और शिरीष 2 महीने पहले ही engineering assistant बनकर आया था। आज कंपनी के वार्षिक समारोह में हमेशा की तरह मंच संचालन का ज़िम्मा वनिता ने ले रखा था और शिरीष व्यवस्था संभाल रहा था। वहीं हुई थी उनकी पहली मुलाकात।
' मैम आपकी आवाज बहुत मीठी है और लहज़ा भी कितना खूबसूरत है। काश मैं भी आपकी तरह बोल पाता।' शिरीष के कहने पर वनिता सर झुका कर मुस्कुरा दी। उसकी प्रशंसा भरी आंखें वनिता के चेहरे से हट ही नहीं रही थीं। तालियों के शोर से गूंजते हुए हॉल में, अगली प्रस्तुति की घोषणा करने वनिता फिर से stage पर चली गई।
वनिता एक बड़ी telecom कंपनी में senior engineer थी और शिरीष 2 महीने पहले ही engineering assistant बनकर आया था। आज कंपनी के वार्षिक समारोह में हमेशा की तरह मंच संचालन का ज़िम्मा वनिता ने ले रखा था और शिरीष व्यवस्था संभाल रहा था। वहीं हुई थी उनकी पहली मुलाकात।
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